शिवपुरी जिला मुख्यालय पर बुधवार शाम को बड़ी संख्या में शिक्षक एकजुट हुए। उन्होंने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उनकी मुख्य मांगों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता खत्म करना और सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति तिथि से करना शामिल है।
शिक्षकों ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रदेश के नॉन-टीईटी शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार, यह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विपरीत है।
शिक्षकों का तर्क है कि एनसीटीई की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना के तहत 3 सितंबर 2001 से पहले और बाद में नियुक्त कई श्रेणियों के शिक्षकों को टीईटी से छूट मिली हुई है। इसके बावजूद, उन्हें विभागीय स्तर पर टीईटी पास करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो न्यायालय की भावना के खिलाफ है
शिक्षकों को राहत दी जाए
शिक्षकों ने मांग की कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 2 मार्च 2026 और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी किए गए आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर कर शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए।
इसके अलावा, शिक्षकों ने अपनी एक और पुरानी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि उनकी सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति तिथि से की जाए। इससे उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण और पदोन्नति जैसे वैधानिक लाभ मिल सकेंगे।
रैली के दौरान शिक्षकों ने सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा