पिछोर बचाओ’ कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब, लेकिन नहीं मिला सबसे बड़ा सवाल का जवाब! किससे बचाना है पिछोर? मंच से नहीं बताया गया; शराब की अवैध बिक्री पर नेताओं का फोकस, बयानों में दिखा विरोधाभास

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शिवपुरी। पिछोर को बचाने के नाम पर मंगलवार को पिछोर बस स्टैंड पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। मंच पर भाजपा और कांग्रेस से जुड़े लोधी समाज के नेता नजर आए और वक्ताओं ने पिछोर के हालात को लेकर चिंता जताई, लेकिन पूरे कार्यक्रम में सबसे अहम सवाल अनुत्तरित ही रह गया आखिर पिछोर को किससे बचाना है कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने पिछोर में शराब की कथित अवैध बिक्री, कानून व्यवस्था और अन्य समस्याओं का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, लेकिन किसी भी वक्ता ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है और ‘पिछोर बचाओ’ की लड़ाई आखिर किसके खिलाफ है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कार्यक्रम के दौरान पिछोर विधायक प्रीतम लोधी रेस्ट हाउस पर मौजूद रहे,जबकि बस स्टैंड पर उनके ही विधानसभा क्षेत्र में पिछोर को बचाने के नाम पर कार्यक्रम चलता रहा।

तीन नेता, तीन बातें और सवाल जस का तस
कार्यक्रम में भाजपा के जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित पड़रिया, मनीराम लोधी और कांग्रेस के विधानसभा प्रत्याशी अरविंद लोधी मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने पिछोर के हालात पर चिंता जताई, लेकिन जब सवाल उठा कि आखिर पिछोर को किससे खतरा है, तो कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया।
यही नहीं, नेताओं के बयानों में भी विरोधाभास देखने को मिला। कांग्रेस के विधानसभा प्रत्याशी रहे अरविंद लोधी ने कहा कि पिछोर में कानून व्यवस्था सहित अन्य गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री और सरकार के जिम्मेदार लोगों से शिकायत की गई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि जब शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कार्यक्रम आयोजित करना पड़ा। वही भाजपा जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित पड़रिया ने इससे अलग बात कही। उनका कहना था कि अभी सरकार से कोई शिकायत ही नहीं की गई है और कार्यक्रम आनन-फानन में आयोजित कर दिया गया।उन्होंने कहा कि यदि सरकार के सामने बात रखी जाती तो कार्रवाई जरूर होती। अब सवाल यह है कि जब एक नेता कह रहा है कि सरकार से शिकायत कर चुके हैं और सुनवाई नहीं हुई, वहीं दूसरा नेता कह रहा है कि सरकार से शिकायत ही नहीं की गई, तो आखिर सच्चाई क्या है

शराब की अवैध बिक्री बनी कार्यक्रम का मुख्य मुद्दा
‘पिछोर बचाओ’ कार्यक्रम में शराब की कथित अवैध बिक्री का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने क्षेत्र में शराब के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए। लेकिन सवाल यह भी है कि यदि शराब की अवैध बिक्री इतने बड़े स्तर पर हो रही है तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और यदि कार्रवाई हो रही है तो फिर ‘पिछोर बचाओ’ जैसे कार्यक्रम की जरूरत क्यों पड़ी

कभी विधायक के करीबी रहे मनीराम ने सुनाया अपना दर्द
कार्यक्रम में मनीराम लोधी ने भी अपनी बात रखी। कभी विधायक प्रीतम लोधी के करीबी माने जाने वाले मनीराम के साथ पिछले दिनों मारपीट की घटना सामने आई थी। इस मामले में हमले को लेकर विधायक के इशारे से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें मनीराम लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष के पति अमित यादव और राकेश के बीच बातचीत होने का दावा किया गया था। ऑडियो में कथित तौर पर 30 लाख रुपए के लेन-देन की बातचीत का दावा किया गया था। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कार्यक्रम में मनीराम लोधी ने कहा कि वह सच्चाई के लिए आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे।

पिछोर बचाओ’ के नारों के बीच असली सवाल कौन उठाएगा?
कार्यक्रम में भीड़ जरूर उमड़ी, नेताओं ने मंच से अपनी-अपनी बातें भी रखीं और पिछोर के हालात को लेकर चिंता भी जताई, लेकिन जिस सवाल ने पूरे आयोजन को सबसे ज्यादा घेरा, उसका जवाब मंच से नहीं मिला। पिछोर को आखिर किससे बचाना है शराब के अवैध कारोबार से,कानून व्यवस्था की कथित बदहाली से, राजनीतिक खींचतान से या फिर आपसी वर्चस्व की लड़ाई से जब तक इस सवाल का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आता, तब तक ‘पिछोर बचाओ’ का यह कार्यक्रम अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है।

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