शिवपुरी। संपत्ति के विवाद में रिश्तों में दरार पड़ने का एक मामला मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सामने आया। पिछोर निवासी उद्योग विभाग से सेवानिवृत्त महेश शर्मा ने अपने सगे भाई, उसकी पत्नी और साले पर मारपीट करने, घर में तोड़फोड़ करने तथा महिला संबंधी झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। महेश का कहना है कि धमकियों के चलते वह अपनी पत्नी के साथ घर छोड़कर झांसी में अपने बेटे के यहां रहने को मजबूर हैं। महेश शर्मा के अनुसार, पिछोर में उनका एक मकान है, जिसमें वह अपनी शासकीय शिक्षिका पत्नी के साथ रहते थे। आरोप है कि उनके सगे भाई विनोद शर्मा की नजर उक्त मकान पर थी। महेश का कहना है कि विनोद ने उनसे मकान करीब 8 लाख रुपए में बेचने की बात कही थी, जबकि मकान की कीमत लगभग 25 लाख रुपए है। महेश द्वारा मकान बेचने से इनकार करने के बाद दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया।
लोहे की रॉड से हमला और तोड़फोड़ का आरोप
पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती आवेदन में महेश ने आरोप लगाया कि 30 अगस्त की रात वह अपने घर पर थे, तभी उनके भाई विनोद शर्मा, उसकी पत्नी संतोषी और विनोद के साले विवेक शर्मा ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत में लोहे की रॉड से हमला करने तथा घर के सामान में तोड़फोड़ करने का भी आरोप लगाया गया है। महेश के मुताबिक, इस दौरान घर के टॉयलेट का पाइप भी तोड़ दिया गया।
महेश का आरोप है कि विवाद के दौरान उनके भाई की पत्नी ने उन्हें महिला संबंधी झूठे मामले में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दी। इस धमकी के बाद वह और उनकी पत्नी भयभीत हो गए और सुरक्षा की चिंता के चलते अपना घर छोड़कर झांसी में रह रहे बेटे मयंक के यहां चले गए।
थाने में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
महेश का कहना है कि घटना के संबंध में उन्होंने पिछोर थाने में शिकायत की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को पारिवारिक विवाद बताकरv कार्रवाई से दूरी बना ली। मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित जनसुनवाई के दौरान महेश शर्मा ने पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया के समक्ष अपनी शिकायत रखी और सुरक्षा के साथ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। एसपी ने उनकी बात सुनने के बाद मामले में आवश्यक पुलिस हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।